Anamika
छायावाद के प्रवर्तकों में सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ का नाम प्रमुख है। ‘मैं’ शैली अपना कर निराला ने हिन्दी कविता को नई दिशा प्रदान की और छन्दों के बन्धन से मुक्त कर उन्होंने हिन्दी कविता के लिए नई ज़मीन तैयार की। ‘अनामिका’ में संकलित कविताएँ इस बात का प्रमाण हैं। ‘अनामिका’ नाम से निराला की कविताओं का संग्रह दो बार प्रकाशित हुआ। पहली बार ‘मतवाला’ के सम्पादक बाबू महादेव प्रसाद ने निराला की चौबीस कविताओं का संग्रह ‘अनामिका’ नाम से प्रकाशित किया था। इसमें निराला की प्रारम्भिक कविताएँ संकलित थीं। 1937 में पुन: ‘अनामिका’ नाम से ही निराला की कविताओं का संग्रह प्रकाशित हुआ। इसे निराला की श्रेष्ठ कविताओं का संग्रह माना जाता है। ‘अनामिका’ को छायावाद का ‘गौरव-ग्रन्थ’ होने का श्रेय प्राप्त है।
सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’
निराला का जन्म वसन्त पंचमी, 1896 को बंगाल के मेदिनीपुर ज़िले के महिषादल नामक देशी राज्य में हुआ। निवास उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले के गढ़ा कोला गाँव में। शिक्षा हाईस्कूल तक ही हो पाई। हिन्दी, बांग्ला, अंग्रेज़ी और संस्कृत का ज्ञान आपने अपने अध्यवसाय से स्वतंत्र रूप में अर्जित किया।
प्राय: 1918 से 1922 ई. तक निराला महिषादल राज्य की सेवा में रहे, उसके बाद से सम्पादन, स्वतंत्र लेखन और अनुवाद-कार्य। 1922-23 ई. में ‘समन्वय’ (कलकत्ता) का सम्पादन। 1923 ई. के अगस्त से ‘मतवाला’ मंडल में। कलकत्ता छोड़ा तो लखनऊ आए, जहाँ गंगा पुस्तकमाला कार्यालय और वहाँ से निकलनेवाली मासिक पत्रिका ‘सुधा’ से 1935 ई. के मध्य तक सम्बद्ध रहे। प्राय: 1940 ई. तक लखनऊ में। 1942-43 ई. से स्थायी रूप से इलाहाबाद में रहकर मृत्यु-पर्यन्त स्वतंत्र लेखन और अनुवाद-कार्य। पहली प्रकाशित कविता : ‘जन्मभूमि’ (‘प्रभा’, मासिक, कानपुर, जून, 1920)। पहली प्रकाशित पुस्तक : ‘अनामिका’ (1923 ई.)।
प्रमुख कृतियाँ : कविता-संग्रह : ‘आराधना’, ‘गीतिका’, ‘अपरा’, ‘परिमल’, ‘गीतगुंज’, ‘तुलसीदास’, ‘कुकुरमुत्ता’, ‘बेला’, ‘अर्चना’, ‘नए पत्ते’, ‘अणिमा’, ‘रागविराग’, ‘सांध्य काकली’, ‘असंकलित रचनाएँ’। उपन्यास : ‘बिल्लेसुर बकरिहा’, ‘अप्सरा’, ‘अलका’, ‘कुल्लीभाट’, ‘प्रभावती’, ‘निरुपमा’, ‘चोटी की पकड़’, ‘भक्त ध्रुव’, ‘भक्त प्रहलाद’, ‘महाराणा प्रताप’, ‘भीष्म पितामह’, ‘चमेली’, ‘काले कारनामे’, ‘इन्दुलेखा’ (अपूर्ण)। कहानी-संग्रह : ‘सुकुल की बीवी’, ‘लिली’, ‘चतुरी चमार’, ‘महाभारत’, ‘सम्पूर्ण कहानियाँ’। निबन्ध-संग्रह : ‘प्रबन्ध प्रतिमा’, ‘प्रबन्ध पद्म’, ‘चयन’, ‘चाबुक’, ‘संग्रह’। संचयन : ‘दो शरण’, ‘निराला संचयन’’, ‘निराला रचनावली’।
निधन : 15 अक्टूबर, 1961

