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Champaran Andolan 1917

Champaran Andolan 1917

DESCRIPTION

चंपारन की संघर्ष-कथा जिस प्रकार राजकुमार शुक्ल के बिना पूरी नहीं हो सकती, उसी प्रकार ‘प्रताप’ के बिना भी पूरी नहीं हो सकती। ‘प्रताप’ ही वह पत्र है, जिसने पहली बार मोहनदास करमचंद गांधी को ‘महात्मा’ कहा था।
4 जनवरी, 1915 के अंक में ‘प्रताप’ ने चंपारन की पीड़ा सुनाते हुए कहा, ‘‘देश के एक भाग के सीधे-सादे शांतिप्रिय आदमियों की यह हालत है। विदेशों में भारतवासियों पर जो अत्याचार हुआ या हो रहा है, वह इस अत्याचार के मुकाबले में अधिक नहीं है।...बाहर के अत्याचार की जड़ उखाड़ फेंकने से घर के इस अँधेरे को दूर करना अधिक हितकर है। निःसंदेह जो अपनी सहायता आप नहीं करता, उसकी सहायता मनुष्य तो दूर रहा, परमात्मा भी नहीं करता। बिहार में क्रियाशीलता की कमी है, पर हम इस बात को कदापि नहीं भूल सकते कि च्यूँटी में भी दम है और बहुत तंग किए जाने पर वह काट खाती है।’’
महेश्वर प्रसाद के ‘बिहारी’ पत्र से विदा होने के पश्चात् चंपारन के दुःख को देश-दुनिया को सुनाने का दायित्व ‘प्रताप’ ने सँभाल लिया। ‘प्रताप’ को गांधी अपने सिद्धांत, व्यवहार, करुणा एवं परदुःखकातरता के लिए ‘प्रिय’ थे तो ‘चंपारन’ अपनी ‘ट्रेजडी’ के कारण। 
इस पुस्तक में ‘प्रताप’, ‘अभ्युदय’, ‘भारतमित्र’, ‘द बिहार हेराल्ड’, ‘हितवाद’, ‘पायोनियर’ जैसे पत्रों में प्रकाशित चंपारन से संबंधित समाचार-रिपोर्ट आदि संकलित हैं। चंपारन की अंतर्कथा को प्रामाणिकता से समझने के लिए यह प्राथमिक स्रोत है। निस्संदेह, भारतीय इतिहास के इस महत्त्वपूर्ण अध्याय को पढ़ने-समझने के लिए ‘चंपारन आंदोलन 1917’ एक पठनीय एवं संग्रहणीय पुस्तक है।

THE AUTHOR

Ashutosh Partheshwar

जन्म : 12 फरवरी, 1982।

शिक्षा : पटना विश्वविद्यालय से स्नातक एवं स्नातकोत्तर।

शोधकार्य : ‘प्रेमचंद के समग्र लेखन के परिप्रेक्ष्य में उनके आरंभिक लेखन (1901-1915) का महत्त्व’ विषय पर पी-एच.डी. उपाधि। ‘नवजागरणकालीन हिंदी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित साहित्येतर विज्ञापनों का अध्ययन’ तथा ‘प्रेमचंद की कहानियों

के हिंदी-उर्दू पाठ का तुलनात्मक अध्ययन’ विषय पर यूजीसी की लघु शोध परियोजना हेतु शोध-कार्य।

प्रकाशन : विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख-शोधालेख प्रकाशित। ‘प्रेमचंद का सोजे-वतन’ व ‘हिंदी विज्ञापनों का पहला दौर’ पुस्तकें प्रकाशित। ‘अनामा’ त्रैमासिक का संपादन। ‘बिहार पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2008’ के निर्माण में भागीदारी। बिहार राज्य के स्कूलों के लिए हिंदी विषय की पाठ्य-पुस्तकों एवं पाठ्य-सामग्री का निर्माण। पटना विश्वविद्यालय एवं नालंदा खुला विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए पाठ्य-सामग्री का निर्माण।

संप्रति : हिंदी विभाग, ओरिएंटल कॉलेज पटना सिटी, पटना।

संपर्क : भगवती कॉलोनी, हाजीपुर-844101 (वैशाली)।

दूरभाष : 9934260232

इ-मेल : parthdot@gmail.com

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