Do Panktiyon Ke Beech
राजेश जोशी भाषा को लिरिकल बनाते हुए उस संगीत तक ले जाते हैं, जहाँ से अर्थों की उड़ान शुरू होती है। वह थियेटर की सभी तकनीकें, प्रश्नाधारित संवाद, लय और गीतात्मकता का सीधा इस्तेमाल करते हैं, किन्तु कविता की मूल प्रतिज्ञा, सूक्ष्मता और संवेदनीयता से नहीं डिगते।
राजेश की कविता की ताक़त रेटारिक का अर्थ ही बदल देती है। वह देखते-देखते भाषा को वस्तु और वस्तु को उसकी अन्तर्वस्तु में बदल देती है।
भोपाल राजेश की कविताओं में एक आर्गेनिक संरचना की तरह गुँथा है। वह उनकी बोली, बानी, मिज़ाज, मौसम सभी कुछ में व्याप्त है। शायद इसी को लक्ष्य कर ऋतुराज ने लिखा था, वह अपने अनुभव को सिरजते वक़्त शोकगीत की लयात्मकता नहीं छोड़ते। लय उनकी कविताओं में सहज भाव से आती है, जैसे कोई कुशल सरोदवादक आलाप में भोपाल राग का विस्तार कर रहा हो!
राजेश की राजनीतिक चेतना किताबी नहीं है। उनके मंतव्य स्पष्ट हैं। निष्कर्षों को लेकर दुविधा नहीं है। राजेश की राजनीतिक सम्मान की कविताएँ रेटारिक या स्थूल होने की जगह बारीकी और नफ़ासत का नमूना पेश करती हैं।
मार्क्सवाद के संस्पर्श से जिन कवियों ने अपनी समझ और संवेदना को गहरा किया है, राजेश जोशी को उनमें अलग से चिह्नित किया जा सकता है।
समय, स्थान और गतियों के अछूते सन्दर्भों से भरी है राजेश की कविता। यहाँ काल का बोध गहरा और आत्मीय है। अपने मनुष्य होने के अहसास और उसे बचाए रखने की जद्दोजहद हैं राजेश की कविताएँ।
(नरेश सक्सेना की एक टिप्पणी से कुछ पंक्तियाँ।)
राजेश जोशी
18 जुलाई, 1946 को नरसिंहगढ़, मध्य प्रदेश में जन्म।
प्रकाशित कृतियाँ : ‘समरगाथा’ (लम्बी कविता); ‘एक दिन बोलेंगे पेड़’, ‘मिट्टी का चेहरा’, ‘धूपघड़ी’ (दोनों संग्रहों का संयुक्त संग्रह), ‘नेपथ्य में हँसी’, ‘दो पंक्तियों के बीच’, ‘चाँद की वर्तनी’, ‘जि़द’, ‘गेंद निराली मीठू की’ (बच्चों के लिए), ‘प्रतिनिधि कविताएँ’, ‘कवि ने कहा’ (कविता-संग्रह); ‘सोमवार और अन्य कहानियाँ’, ‘कपिल का पेड़’, ‘मेरी चुनी हुई कहानियाँ’ (कहानी-संग्रह); ‘क़िस्सा-कोताह’ (आख्यान); ‘जादू जंगल’, ‘अच्छे आदमी’, ‘पाँसे’ और ‘सपना मेरा यही सखी’, ‘ब्रह्मराक्षस का नाई’ (बच्चों के लिए) (नाटक); ‘हमें जवाब चाहिए’ (नुक्कड़ नाटक); ‘पतलून पहिना बादल’ (अब ‘ब्लादीमिर मायकोव्स्की की कविताएँ’ शीर्षक से प्रकाशित), भर्तृहरि की कविताओं की अनुरचना : ‘भूमि का यह कल्पतरु’ (अनुवाद); ‘एक कवि की नोटबुक’, ‘एक कवि की दूसरी नोटबुक : समकालीनता और साहित्य’ (आलोचनात्मक टिप्पणियाँ और नोटबुक), ‘कविता का शहर : एक कवि की नोटबुक’ (भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में कविता और शहर के सम्बन्ध पर लिखा गया मोनोग्राफ़)।
कविताएँ अनेक भारतीय तथा विदेशी भाषाओं में अनूदित।
सम्पादन : ‘इसलिए’ (प्रकाशन-सम्पादन, 1977-83), ‘नया पथ’ के निराला शताब्दी अंक के साथ पाँच अंक, ‘वर्तमान साहित्य’ का कविता विशेषांक (1992), त्रिलोचन के कविता-संग्रह ‘ताप के ताए हुए दिन’ (1980), ‘नागार्जुन संचयन’ (साहित्य अकादेमी, 2005), ‘मुक्तिबोध संचयन’ (भारतीय ज्ञानपीठ प्रकाशन, 2015)।
पुरस्कार : ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’, ‘श्रीकान्त वर्मा स्मृति सम्मान’, ‘पहल सम्मान’, ‘शमशेर सम्मान’, ‘मुक्तिबोध पुरस्कार’, ‘माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार’, ’शिखर सम्मान’, ‘मुकुटबिहारी सरोज स्मृति सम्मान’, ‘निराला स्मृति सम्मान’, ‘कैफ़ी आज़मी अवार्ड’, ‘प्रो. आफ़ाक़ अहमद स्मृति अवार्ड’, ‘जनकवि नागार्जुन स्मृति सम्मान’, ‘शशिभूषण स्मृति नाट्य सम्मान’ आदि।
ईमेल : rajesh.isliye@gmail.com

